25, అక్టోబర్ 2011, మంగళవారం

आँखो में मस्ती शराब की - छाया (1961)

यह गाना तलत महमूद की शानदार गानो में से एक है

आँखो में मस्ती शराब की
काली जुल्फों में राते शबाब की
जाने आई कहाँ से टूट के
मेरे दामन मे पंखुडी गुलाब की हए
आँखो में मस्ती शराब की
काली जुल्फों में राते शबाब की
जाने आई कहाँ से टूट के
मेरे दामन मे पंखुडी गुलाब की हए
आँखो में मस्ती शराब की

चाँद का टुकडा कहूँ या हुस्न की दुनिया कहूँ
चाँद का टुकडा कहूँ या हुस्न की दुनिया कहूँ
प्रीत की सर्गम कहूँ या प्यार का सपना कहूँ
सोचता हूँ क्या कहूँ
सोचता हूँ क्या कहूँ इस शोक को मै क्या कहूँ
आँखो में मस्ती शराब की
काली जुल्फों में राते शबाब की
जाने आई कहाँ से टूट के
मेरे दामन मे पंखुडी गुलाब की हए
आँखो में मस्ती शराब की

चाल कहती है न हो पेहली घटा बरसात की
चाल कहती है न हो पेहली घटा बरसात की
हर अदा अपनी जगह तारिफ हो किस बात की
आरजू कितने दिनों से
आरजू कितने दिनों से थी हमे इस रात की
आँखो में मस्ती शराब की
काली जुल्फों में राते शबाब की
जाने आई कहाँ से टूट के
मेरे दामन मे पंखुडी गुलाब की हए
आँखो में मस्ती शराब की


गायक - तलत महमूद
संगीत निर्देशक - सलिल चौधरी
बोल - राजेंद्र क्रिशन
कलाकार - सुनील दत्त, आशा पारेख

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